Dewali puja muhart दिवाली पूजा मुहर्त ऐसे करे शुरू

Dewali puja muhart दिवाली पूजा मुहर्त – दीपावली हिन्दू लोगो का एम प्रमुख त्य्वाहर है इसको छोटे से बड़े लोग बहुत ही खुसी से मानते है और इस बार दिवाली चार नवम्बर को मनाई जाने है और लोगो को तारीख तो पता होता है लेकिन दीपावली पूजा का शुभ समय नहीं पता होता है

Dewali puja muhart दिवाली पूजा मुहर्त

Dewali puja muhart दिवाली पूजा मुहर्त

दिवाली की बात करे तो दिवाली हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है और दिवाली का शुभ मुहर्त का भी एक समय होता हैऔर हिन्दू में लगभग सभी त्य्वाहर २ दिन मनाया जाता है तो सबसे पहले छोटी दिवाली कब है इसकी बात करते है तो छोटी दीपावली आज यानि ३ नवाबर को है

दीपावली कब है दीपवाली मानाने का समय 

और बड़ी विपवाली कब है इसकी बात करे तो बड़ी दीपावली कल यानी ४ नवम्बर को है दीपवाली मनाने के शुभ समय की बात करे तो दीपावली मानाने का शुभ समय 09:02 बजे से अगले दिन सुबह 06:03 बजे तक का है

 

और यह समय दीपवाली मानाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है और इस समय में आप अपने घर परिवार के साथ कभी भी दीपवाली मना सकते है और दीपवाली क्यू मनाया जाता है इसके बारे में बात कर लेते है

दीपावली क्यू मनाया जाता है

आज से कई साल पहले जब राम जी बनवाश गए थे तो उन्होंने बन में 14 साल बिताये थे और राम अयोध्या के सभी लोगो के प्यारे थे और जब राम के 14 साल पुरे हुए तो वो जब अयोध्या में लौट कर के आये तो उनको पुरे अयोध्या वाशियों ने अपने ख़ुशी को दिखने के लिए पुरे अयोदया को दीप से भर दिया

 

और उस दिन पुरे अयोदया में उजाले की महामार हो गयी और उस दिन को याद करने के लिए लोग दीपावली मानते है और यह कई सालो से चला आ रहा है और आज भी लोग दीपावली में अपने घरो को दीपक से भर देते है और लोग तरह तरह तरह के पकवान और मिठाई बनते है और दीपावली मानाने के साथ झूम झुमके पटाके के साथ इसका आननद लेते है

दीपवाली पर लक्ष्मी जी की पूजा क्यू करते है

और दीप लक्ष्मी जी का प्रतिक है और लोगो का मानना है की लोग जब इनकी पूजा करते है तो इन लोगो के घर में लक्ष्मी जी का प्रवेश होता है और इसी के वजह से लोग दीपवाली के डैन लक्ष्मी और अन्य देवताओ के पूजा किये जाते है और इस बार दीपवाली पूजा सक शुब समय 09:02 बजे से अगले दिन सुबह 06:03 बजे तक का है

 

दिवाली 2021 पूजा विधि

नरक चतुर्दशी के दिन लोग भगवान कृष्ण, काली माता, यम और हनुमान जी की पूजा करते हैं। मानता है कि इससे आत्मा की शुद्धि होती है और पूर्व में किए गए पापों का नाश होता है। इसके साथ ही नरक में जाने से भी मुक्ति मिलती है।

कुछ स्थानों पर छोटी दिवाली के मौके पर नरकासुर का पुतला दहन किया जात है। यह देश के विभिन्न इलाकों में मनाया जाता है।

छोटी दिवाली इतिहास और महत्व

हिन्दी मान्यताओं के अनुसार नरकासुर ने वैदिक देवी ,अतिथि के सम्राज को हड़प लिया था।, उसने बहुत सी महिलाओं को प्रताड़ित, भी किया था। नरकासुर के खिलाफ, भगवान कृष्ण और सत्यभागा में संघर्ष किया और ,युद्ध में मार गिराया। वहीं नॉर्थ ईस्ट इलाके, लोगों का मानना है कि नरकासुर का वध काली देवी, ने किया था। यही कारण है कि छोटी दिवाली, (Chhoti Diwali 2021) के दिन काली, मां की पूजा भी की जाती है-

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